ये लेख हम ने विस्फोट.काम से लिया है......
यह अनूप भार्गव की टिप्पणी है सुबीर संवाद सेवा पर. अनूप बाबू आपने कहा है कि आप पुराने आईआईटीयन रहे हैं. इसलिए यह पढ़कर आपको अच्छा नहीं लगा कि हिन्दी किसी कालेज की बपौती नहीं है. आप तकनीकि शिक्षा और हिन्दी प्रेम को अलग-अलग करके देख रहे हैं. मेरा सवाल भी यही है. क्या तकनीकि शिक्षा और हिन्दी प्रेम अलग-अलग होने चाहिए?
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आपका
अनुप

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