भारतीय समाज या फिर कोई भी समाज जो एक क्रमिक प्रणाली से विकसित होता है वहां ऐसी बहुत सी धाराएं अपनेआप बह निकलती हैं जो समाज के हर वर्ग की जरूरतों को पूरा करती हैं. लेकिन संगठित मानसिकता के लोगों को यह सब बर्दास्त नहीं. पूरी दुनिया उनकी मुट्ठी में होनी चाहिए. आईआईटी और आईआईएम जैसे शिक्षा संस्थान भारत को गुलाम बनाने का काम करते हैं. ये संस्थान ऐसे मजदूर तैयार करते हैं जो विदेशी प्रणाली को देश पर काबिज होने में मदद करती हैं. जो लोग आईआईटी और आईआईएम पर बहुत गर्व करते हैं न तो उन्हें भारत के बारे में कुछ खास मालूम है और न ही इस संस्थानों की स्थापना के बारे में.
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