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29 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (5)
हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़े पर औपचारिक फातिहे पढ़कर रस्मअदायगी की जाती रही है पर समस्या के मूल तक जाने में न किसी की दिलचस्पी है, न इसकी ज़रूरत समझी जाती है। ऐसे शुष्क और नीरस माहौल में, जहाँ हिंदी दिवस के नाम पर कई कार्यालयों में हिंदी में ... आगे पढ़ें...

हमारे देश में यह आम धारणा है कि विदेशों में अंग्रेज़ी ही चलती है, अंग्रेज़ी के बिना हम विदेशों से संपर्क नहीं रख सकते, अंग्रेज़ी के जरिए ही विदेशी मुल्कों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उन्नति की है। इस तरह की दकियानूसी और पिछड़ेपन की बातों पर लंबी ... आगे पढ़ें...

देश के संविधान ने हिन्दी को भारतीय संघ की राजभाषा घोषित किया। हिन्दी को उसका स्थान मिले, इसके लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण नियम भी बने, लेकिन हिन्दी को उसका वह अधिकार, वह प्रतिष्ठा नहीं मिली जो उसे मिलनी चाहिए थी। जहां प्रजा की भाषा को ही उसका स्थान न ... आगे पढ़ें...