हमारे देश में यह आम धारणा है कि विदेशों में अंग्रेज़ी ही चलती है, अंग्रेज़ी के बिना हम विदेशों से संपर्क नहीं रख सकते, अंग्रेज़ी के जरिए ही विदेशी मुल्कों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उन्नति की है। इस तरह की दकियानूसी और पिछड़ेपन की बातों पर लंबी बहस चलाई जा सकती है लेकिन यहाँ मैं केवल उन छोटे-मोटे अनुभवों का वर्णन करूँगा जो पूरब और पश्चिम के देशों में भाषा को लेकर मुझे हुए।
मैं एशियाई देशों में अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और तुर्की गया,
......................(टिप्पणी के कुछ अंश ही हम यहाँ दे पाए. यह पूरी टिप्पणी आप http://www.abhivyakti-hindi.org//snibandh/hindi_diwas/videshomeangrezi.htm पर देख सकते हैं.)

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