By Balendu Sharma Dadhich बालेन्दु शर्मा दाधीच 19/08/07सूचना प्रौद्योगिकी का उद्गम भले ही अमेरिका में हुआ हो, भारत के योगदान के बिना वह अस्तित्व में ही नहीं आ सकती थी। कंप्यूटर न क्वीन्स इंग्लिश जानता है और न फ्रेंच। वह तो सिर्फ अंकों की भाषा समझता है। वो ... आगे पढ़ें...
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हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है आज यह सूत्र वाक्य बेमानी सा लगने लगा है. मन के किसी कोने से अंग्रेजी के प्रति प्रेम भाव जागता है और हिंदी अधिकारी, हिंदी के प्राध्यापक और हिंदी के प्रति सब कुछ न्योछावर करने का संकल्प लेने वाले भी अपने बच्चों को कान्वेंटी शिक्षा ... आगे पढ़ें...
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हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़े पर औपचारिक फातिहे पढ़कर रस्मअदायगी की जाती रही है पर समस्या के मूल तक जाने में न किसी की दिलचस्पी है, न इसकी ज़रूरत समझी जाती है। ऐसे शुष्क और नीरस माहौल में, जहाँ हिंदी दिवस के नाम पर कई कार्यालयों में हिंदी में ... आगे पढ़ें...
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हमारे देश में यह आम धारणा है कि विदेशों में अंग्रेज़ी ही चलती है, अंग्रेज़ी के बिना हम विदेशों से संपर्क नहीं रख सकते, अंग्रेज़ी के जरिए ही विदेशी मुल्कों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उन्नति की है। इस तरह की दकियानूसी और पिछड़ेपन की बातों पर लंबी ... आगे पढ़ें...
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देश के संविधान ने हिन्दी को भारतीय संघ की राजभाषा घोषित किया। हिन्दी को उसका स्थान मिले, इसके लिए समय-समय पर कई महत्वपूर्ण नियम भी बने, लेकिन हिन्दी को उसका वह अधिकार, वह प्रतिष्ठा नहीं मिली जो उसे मिलनी चाहिए थी। जहां प्रजा की भाषा को ही उसका स्थान न ... आगे पढ़ें...
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जब तक मनुष्य की सोच नहीं बदलेगी तब तक कुछ नया नहीं हो पाएगा। यूरोप के एक विद्वान ने कहा है कि यदि आप 21वीं सदी में कुछ नया करना चाहते हैं तो आपको पहले अपनी सोच बदलनी होगी। दुर्भाग्य से हमारे देश के अन्दर सभी वर्गों की सोच विकृत हो गई है। किसान की सोच का ... आगे पढ़ें...
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इस आलेख के माध्यम से यह स्थापित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रवाद और भाषा अविभाज्य रूप से जुडे हैं। किसी भी राष्ट्र में, राष्ट्रवाद के विकास के साथ उस राष्ट्र की भाषा या भाषाओं की उन्नति होती है, और राष्ट्रवाद की भावना के क्षरण के साथ उसकी भाषाओं ... आगे पढ़ें...
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वर्तमान शिक्षा का इतिहास अधिक प्राचीन नहीं है। प्राय: लोग इसे मैकाले की शिक्षा प्रणाली के नाम से पुकारते हैं। लार्ड मैकाले ब्रिटिश पार्लियामेन्ट के ऊपरी सदन (हाउस आफ लार्ड्स) का सदस्य था। 1857 की क्रान्ति के बाद जब 1860 में भारत के शासन को ईस्ट इण्डिया ... आगे पढ़ें...
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बहुत चर्चा होती है आजकल हिन्दी में हो रही तकनीकी प्रगति की, खासतौर पर आईटी में। इस नाचीज ने सुझाव दिया था कि हम अमरीका के ह्रदय में सम्मेलन कर रहे हैं। हमें भारत में आ चुकी और आने की इच्छा रखने वाली हर बडी आईटी कंपनी को निमंत्रित करना चाहिए सम्मेलन में ... आगे पढ़ें...
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कुछ लोग इतने अमीर हो गये हैं कि वे विदेशी कंपनियां खरीद रहे हैं. बाकी के लोग इतने गरीब हो गये हैं कि वे दो जून की रोटी भी नहीं खरीद पाते आगे पढ़ें...
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भारतीय समाज या फिर कोई भी समाज जो एक क्रमिक प्रणाली से विकसित होता है वहां ऐसी बहुत सी धाराएं अपनेआप बह निकलती हैं जो समाज के हर वर्ग की जरूरतों को पूरा करती हैं. लेकिन संगठित मानसिकता के लोगों को यह सब बर्दास्त नहीं. पूरी दुनिया उनकी मुट्ठी में होनी ... आगे पढ़ें...
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तकनीकी शिक्षा और हिन्दी से प्रेम में विरोधाभास नहीं है आगे पढ़ें...
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